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अच्छे दिन अइहैं (बघेली)

डूबत नैया बैंक की , नेता पार लगई हैं रे ,

नई नई स्कीमें लाके ,ओव्हर लोड करई हैं रे ।

वोटन के ई राजनीति मा पहिलेन से सब चुसरे हैं ,

मुसबा बनके सलगे नेता, ओढ़नन तक का कुतरे हैं ।

जन धन की फूटी मटकी से ,पियासन मरा किसान रे,

दार पहुच गय दुई सो रुपिया ,घर नहीं कहौं पिसान रे ।

बँकन मा एन पी ए बढ़ी है कोउ नही देखईया रे ,

आँख मूँद बकलोल बने सब, शासन और नेतैया रे ।

बीस गुनी महगाई बाढी ,पाँच साल मा दइया रे ,

तऊ आयकर ओतनेन से ,है हमरे ब्लैक रुपैया रे ।

हुमच के भासन देहैं बाहर ,भीतर मुसबा लोटै रे ,

हम भूखे, झुरान ओंठ ,उईं दार भात सरपोटै रे ।

अबहूँ कहथे देश के नेता , नैया पार लगई हों रे ,

खुद चाहे डूबे हम भईया ,अच्छे दिन तऊ अइहैं रे ।

कुत्ता

पर्यावरण