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कोरोना पर शिवजी ..

हे   शिवशंकर , नीलकंठ ,  मृत्युंजय,  शंभू   त्राहिमाम,

संकट  है  जन जीवन  पर अब दया  करो हे दिव्यमान l

मंथन  जनित  जहर  पीकर   तुमने  था आकंठ किया, 

धरा संतुलित कर तुमने था हम सबको निष्कंट  किया l

काल लीलकर लाखो को अब खुलकर नर्तन करता है,

चारों तरफ  है मौत  चीखती  हर क्षण मानव मरता है l  

सूक्ष्म  वायरस  कोरोना ने  दुनिया  को  मजबूर किया,

सहम संक्रमण से हम सबको, प्रिय जन से है दूर किया l

त्रिनेत्र तेज से भष्म करो डमरू से डमडम स्वरण करो,  

त्रिशूल  शूल  से विच्छेदित कर  कोरोना का हरण करो l

मानव, तुम अब  आर्तनाद  कर करुण भाव से आये हो ,

तप  में  लीन महेश्वर को क्यूँ  असमय अभी जगाये हो l

विषपान की याद दिलाकर अब क्या चाह रहेहो कहने को,

यह श्रृष्टि बनी फल कर्मो की सब शांति पूर्वक रहने को l

सर्वांग शक्ति और बुद्धि ज्ञान के स्त्रोत खोल समृद्ध किया,

मैंने भोजन में अन्न दिया जल से सबको  संपन्न किया l

जीवों कीटो का सृजन किया कि प्रकृति संतुलन रक्षण हो,

वातावरण  सुरक्षित   रहकर    जीवों   का  संरक्षण  हो l

चमगादड़  से कनखजुरे  तक  थे जीवों  को  तुमने  खाए, 

वे  कीट पतंगे , विषधर भी क्या  भक्षण से  हैं  बच पाए l

छेड छाड़   कर धरा  प्रबंधन  वृक्षों  का  संहार  किया,

सुन्दर नदियों में औद्योगिक विष,कचरों का संचार किया l

नाश किया तुमने सब कुछ , मै क्यों त्रिनेत्र का जोग करूँ,

कर्मो  से  खुद  विफल  रहोगे ,मै  ही क्यूँ  विषभोग करू l

दारुण दुःख मै भी  झेला  जब  सती को मैंने  खोया था,

अपने  खुद का  भान नहीं  बरसों  कन्धे पर  ढोया था l 

तब  क्या  मेरे  अंधकार  मय  दुःख  पर  कोई रोया  था,

तुम आम कहाँ से पाओगे जब खुद बबूल  को बोया था l

हे मानव भोगो कर्म फलों को ,चाहे तुम विष वमन करो,

मै ही क्यूँ विष को पियूं सदा,खुद कोरोना का शमन करो l

संघर्ष में विचलित न होना चाहे कुछ भी दुःख कारी  हो,

मै  साथ  तुम्हारे सदा रहूँ  बस पालन  करना  जारी हो l

मास्क लगाओ ,दूरी रह कर  हर भूखे  को   तृप्त  करो, 

बाहर घर से निकलो मत,हर बार हाथ को स्वच्छ  करो l

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Written by B.L.RAI

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