जिस हाथ कभी फूल देकर आया था,
आज वही पत्थर लिए मेरी तलाश मे हैं l
बेशक़ हमारी वफ़ाओं को तू भुला दे,
पर साथ जिये लम्हे, मेरे अहसास मे है l
टेढ़ी नजरों से सही, आइना देखा तो करो,
हमारी यादों का पिटारा,तुम्हारे पास मे है l
ज़माने बीतते गये पाकनीयती की ताक मे,
तू लौटे शायद, तभी जिन्दा हर सांस मे है l
बेवफाई की मुझ पर तू तोहमत न लगा दे,
इसीलिए मरने तकआँखें होशोहवास मे है l
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