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बुजुर्ग..

आजीवन छाया में जिसके ,

            रहे मुदित मन इठलाते  l

रेंगा दौड़ा उड़कर भी ,

             हम उन्हें जान न पाते  l

आज जानना है उनको ,

            उनके सुखदाई पल को l

उसी भाव से वापस कर दें,

           उनके बीते प्रिय कल को l

बीता कल है कहाँ लौटता,

            काश वही सुख दे पायें l

बची जिन्दगी के सुखमय पल,          

आओ ..अब  हम लौटाएं

सांसों का मोल

भटकन