in

हौसला ..

तुम्हारी लाठी  मेरा हौसला

तुम थक जाओगे शरीर  से

क्रोध भी तुम्हे  तोड़ देगा ।

मेरा हौसला तब बढ़ेगाऔर

तब तलक शरीर तुम्हारा

चूर हो साथ छोड़ देगा ।

तुम्हारी हर अभिव्यक्ति में

हिंसा मिश्रित गालियाँ

पर शब्द  का आभाव है ।

लुट चुकी शालीनता  मे

बॉडी लेंग्वेज  के सहारे

झगङे का बरताव है ।

हौसला का श्रोत मन   है

तेरे मन पर सेंध लगाकर मुझे

अहिंसा में अटूट विश्वास है

डर समझने की भूल मत करना

सादगी है हमारा शस्त्र,

जिसका तूने किया उपहास है ।

लाठी  चलाने की  थकन से

ऊर्जा सूखकर  इंसानियत की

प्रत्यासा  जगाएगी ।

अहिंसा  की परिभाषा

वहीं बर्दाश्त की हद में

तुम्हे रहना सिखाएगी  ।

तुम्हे चाहिए  मेरा घाव,

जिसके मवाद को चखकर,

स्वाद में व्यस्त  रहो ।

प्रगति की बेतहासा दौड़ में

हम आगे निकल जाएं और,

तुम चखने में मस्त  रहो ।

उपेक्षित..

काल राक्षस ..