मेरा दोस्त ,कभी अपराधी था ,
मूछें ऐंठकर लगता मिजाजी था
कई बार हो आए जेल .
स्वतंत्रता सेनानी की भांति,
गर्वोन्नत चेहरा लिए
जेल को समझते थे खेल .
कुछ समय पास हुआ तब ,
मेरा दोस्त उदास हुआ
दर्द में डूबकर
दलितों-गिरिजनों को
मुहरा बनाया ,
गांधी की फोटो ले आया,
और खादी का कुरता सिलवाया,
कोठियों में बैठ कर
गरीबी पर चर्चा ,
पहनावे और दिखावे में
लाखों का खर्चा
फिर पलट जब मैंने देखा..
बिखरे बाल माथे पे रेखा ,
तब मैंने पूछा ……..
क्या हुआ हे अपराधी प्रणेता…. ?
उसने कहा
ट्रेनिंग खतम हुई ,
अब देखना ..
मैं बनूँगा देश का एक सफल नेता ……..